#1कांच ही बांस के बहंगिया
bhojpuriस्वरकोकिला शारदा सिन्हा

जय छठी मईया
"कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..." — छठी मईया के पावन गीतों से गूंजता हर घाट

स्वर: स्वरकोकिला शारदा सिन्हा
छठ पूजा के चारों पावन दिनों के विशेष लोकगीत सुनें
13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
पवित्र नदी स्नान, सात्विक कद्दू भात एवं चने की दाल का प्रसाद ग्रहण।
14 नवंबर 2026 (शनिवार)
दिनभर का निर्जला उपवास, संध्या समय गुड़-खीर (रसिया) एवं रोटी का पावन प्रसाद।
15 नवंबर 2026 (रविवार)
अस्ताचलगामी भगवान सूर्य देव को डूबते समय ठेकुआ एवं फलों से प्रथम अर्घ्य अर्पण।
16 नवंबर 2026 (सोमवार)
उदीयमान सूर्य देव को दूसरा अर्घ्य अर्पण एवं पारण के साथ व्रत का पावन समापन।
सूर्यास्त एवं सूर्योदय का पावन अर्घ्य समय
अस्ताचलगामी सूर्य उपासना
उदीयमान सूर्य उपासना
हर अवसर और पूजा विधि के लिए विशेष रूप से तैयार की गई सूचियां
स्वरकोकिला शारदा सिन्हा जी के अमर एवं सर्वप्रिय पावन छठ लोकगीत महासंग्रह। कांच ही बांस के बहंगिया, उगिह हे दीनानाथ एवं अन्य पावन रचनाएं।
पवन सिंह के ऊर्जावान एवं भक्तिमय छठ लोकगीतों का विशेष संकलन। उगी हे सुरुज देव, छठी माई के बरतिया एवं अन्य लोकप्रिय गीत।
सदियों से गाए जाने वाले अति-पवित्र एवं पारंपरिक छठ लोकगीत महा-संग्रह। अनुराधा पौडवाल, मालिनी अवस्थी एवं भक्ति संगीतांजलि।
छठ महापर्व के उत्साहवर्धक आधुनिक रीमिक्स, ढोल बीट्स एवं डीजे भक्ति लोकगीत संग्रह।
तृतीय दिवस संध्या अर्घ्य एवं अस्ताचलगामी भगवान भास्कर (सूर्य देव) की पूजा-अर्चना के भक्तिमय लोकगीत।
चतुर्थ दिवस उषा अर्घ्य एवं उदीयमान सूर्य देव के पावन भोरवा अर्घ्य लोकगीत संग्रह।
भक्तों द्वारा सर्वाधिक सुने जाने वाले पावन गीत
#1स्वरकोकिला शारदा सिन्हा
#2पवन सिंह
#3मालिनी अवस्थी
#4सोनाली सृष्टि
#5अनिता शिवानी
#6अरविंद राय
#7पवन सिंह
#8स्वरकोकिला शारदा सिन्हा
#9अनुराधा पौडवाल
#10खेसारी लाल यादव
#11विशाल मिश्रा, कौशल किशोर
#12डीजे रीमिक्स पूर्वांचल
#13स्वरकोकिला शारदा सिन्हा
#14अनुराधा पौडवाल
#15स्वरकोकिला शारदा सिन्हा
#16पवन सिंह
#17स्वरकोकिला शारदा सिन्हा
#18नीलकमल सिंह
#19नीलकमल सिंह
#20खेसारी लाल यादव
#21अक्षरा सिंह
#22अरविंद अकेला कल्लू
#23मनोज तिवारी
#24कल्पना पटवारी
#25अनुपमा यादव
शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल, पवन सिंह, खेसारी लाल एवं अन्य महान कलाकारों के संपूर्ण भजन
जिनके सुरीले स्वरों से हर छठ घाट गुंजायमान होता है

पद्म भूषण - बिहार की स्वरकोकिला
"बिहार की सुप्रसिद्ध लोकगायिका जिन्होंने छठ पर्व को अपनी मधुर वाणी से अमर बना दिया।"

पद्म श्री - भक्ति संगीत साम्राज्ञी
"अपनी मधुर और सात्विक गायकी से करोड़ों छठ भक्तों के हृदय में बसने वाली महान गायिका।"

भोजपुरी संगीत सम्राट
"युवा वर्ग के सबसे पसंदीदा लोकगायक, जिनके छठ गीत हर साल रिकॉर्ड बनाते हैं।"

पद्म श्री - शास्त्रीय लोकगायिका
"पूर्वांचल और बिहार की पारम्परिक लोक कला को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने वाली विदुषी।"

भोजपुरी ट्रेंडिंग स्टार
"लोकप्रिय भोजपुरी लोकगायक जिनके आधुनिक एवं पारंपरिक छठ गीत लाखों भक्तों द्वारा सुने जाते हैं।"

भोजपुरी लोकगायक एवं पुरोधा
"भोजपुरी के दिग्गज लोकगायक जिन्होंने पारंपरिक छठ गीतों को पूरे देश व विदेश में प्रतिष्ठित किया।"

युवा दिलों की धड़कन लोकगायक
"भावुक और अत्यंत सुरीली गायकी के धनी लोकप्रिय युवा भोजपुरी गायक जिनके छठ गीत बहुत पसंद किए जाते हैं।"

भोजपुरी युवा स्टार गायक
"लोकप्रिय युवा भोजपुरी स्टार गायक जिनके छठ गीत श्रद्धा, आस्था और उमंग से परिपूर्ण होते हैं।"

भोजपुरी संगीत व अभिनय साम्राज्ञी
"सुप्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेत्री एवं गायिका, जिनकी मधुर वाणी में छठ गीत अत्यंत लोकप्रिय हैं।"
छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और छठी मईया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे अनूठा और पवित्र महा-अनुष्ठान है। यह प्रत्यक्ष देव सूर्य भगवान की उपासना का पर्व है, जो समस्त सृष्टि को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन प्रदान करते हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में व्रती बिना जल ग्रहण किए कड़े नियमों का पालन करते हैं।
छठ महापर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूर्ण पर्यावरण-अनुकूलता और सात्विकता है। इसमें प्रयुक्त होने वाली हर सामग्री — कांच के बांस की बहंगी, सुपेली, माटी का दीया, ठेकुआ, गन्ना, और सुथनी — सीधे प्रकृति माँ से प्राप्त होती है। इसमें न तो किसी पुरोहित की आवश्यकता होती है और न ही किसी भव्य मंदिर की; पवित्र नदी का घाट ही ईश्वर का सबसे विशाल द्वार बन जाता है।
यह पर्व सामाजिक समरसता और समानता की अनुपम मिसाल है। गंगा घाटों पर अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का भेद समाप्त हो जाता है। सब मिलकर एक ही घाट पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं और अस्त होते तथा उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यही समरसता छठ पर्व को संपूर्ण भारत वर्ष की लोक-आस्था का अमर प्रतीक बनाती है।
छठ गीतों के बिना यह महापर्व अधूरा है। शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल, और पवन सिंह जैसे महान कलाकारों के स्वर में "कांच ही बांस के बहंगिया" और "उगी हे सुरुज देव" जैसे गीत हर घर और हर घाट को भक्तिमय बना देते हैं। हमारा यह मंच इन्हीं पावन लोकगीतों को संजोने और दुनिया भर के छठ भक्तों तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।
सत्य, अहिंसा, पवित्रता और सूर्य उपासना का सर्वोपरि पर्व
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को अस्ताचलगामी (डूबते हुए) भगवान सूर्यदेव को पहला अर्घ्य दिया जाता है। बांस की बहंगी में ठेकुआ, गन्ना, नारियल, और फल लेकर समूचा परिवार गंगा तट पर एकत्र होता है।